Begin typing your search...

गुजरात के 'गुरुजी' की कुंडली हुई बेनकाब! आश्रम में चला रहा था नकली नोटों का कारखाना, 6 शिष्य समेत पहुंचा सलाखों के पीछे

गुजरात के अहमदाबाद में आध्यात्मिक संगठन की आड़ में चल रहे नकली नोट रैकेट का खुलासा, 2.9 करोड़ के फर्जी नोट बरामद, 6 आरोपी गिरफ्तार.

गुजरात के गुरुजी की कुंडली हुई बेनकाब! आश्रम में चला रहा था नकली नोटों का कारखाना, 6 शिष्य समेत पहुंचा सलाखों के पीछे
X
( Image Source:  @SupriyaShrinate- X )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी4 Mins Read

Updated on: 20 March 2026 4:59 PM IST

गुजरात में नकली नोटों के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने कानून व्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों के भरोसे पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने अमराईवाड़ी इलाके में कार्रवाई करते हुए एक ऐसे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया, जो आध्यात्मिक संगठन की आड़ में करोड़ों के नकली नोट बाजार में खपा रहा था.

इस पूरे मामले में पुलिस ने एक महिला समेत 6 लोगों को हिरासत में लिया है और शुरुआती कार्रवाई में ही 2 करोड़ रुपये के नकली 500 रुपये के नोट जब्त किए गए. जांच आगे बढ़ने पर यह नेटवर्क अहमदाबाद से सूरत तक फैला हुआ निकला, जहां से और 80 लाख रुपये के नकली नोट बरामद हुए. कुल बरामदगी अब 2.9 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है.

आखिर कैसे पकड़ा गया नकली नोटों का यह बड़ा खेल?

क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि शहर में नकली नोटों की बड़ी खेप आने वाली है. इसके बाद पूरी रात अमराईवाड़ी इलाके में निगरानी रखी गई. संदिग्ध गतिविधियां दिखते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपियों को दबोच लिया. जांच के दौरान पता चला कि नकली नोट एक वाहन में ले जाए जा रहे थे, जिस पर भारत सरकार और आयुष मंत्रालय के निशान लगे थे. इसी वजह से यह वाहन बिना किसी शक के आसानी से कई जगहों पर घूम रहा था.

‘सत्यम योग फाउंडेशन’ की आड़ में कैसे चल रहा था पूरा नेटवर्क?

जांच में सामने आया कि यह पूरा रैकेट ‘श्री सत्यम योग फाउंडेशन’ के नाम से संचालित हो रहा था. इस संगठन के आश्रम को ही नकली नोटों के ऑपरेशन का केंद्र बनाया गया था. मुख्य आरोपी प्रदीप जोतंगिया उर्फ ‘गुरुजी’ इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जो आध्यात्मिक गतिविधियों की आड़ में इस अवैध कारोबार को चला रहा था.

नकली नोट कहां छपते थे और कैसे होता था वितरण?

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि नकली नोट सूरत के वराछा इलाके में छापे जाते थे. इसके बाद अहमदाबाद और अन्य शहरों में सप्लाई की जाती थी. क्राइम ब्रांच ने सूरत पुलिस के साथ मिलकर छापेमारी की, जहां एक पूरा प्रिंटिंग सेटअप मिला. यहां से मशीनें, कच्चा माल और कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए, जिससे यह साफ हो गया कि यह एक पूरी तरह संगठित अवैध यूनिट थी.

क्या था नकली नोटों का ‘डील मॉडल’?

जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ कि आरोपी असली 500 रुपये के बदले 1500 रुपये के नकली नोट देने का लालच देते थे. एक सौदे में तो 66 लाख रुपये के असली नोट लेकर 2 करोड़ रुपये के नकली नोट देने की तैयारी थी. यानी कम समय में तीन गुना पैसा कमाने का झांसा देकर लोगों को फंसाया जा रहा था. जांच की कड़ी राजकोट तक भी पहुंची, जहां आरोपी ‘सत्यम योग एंड हेल्थ सेंटर’ के नाम से योग क्लास चलाता था. पुलिस ने वहां भी छानबीन की और उसके भाई से पूछताछ कर मोबाइल व दस्तावेजों की जांच की. इसके अलावा आरोपी के सहयोगी मुकेश के घर पर भी छापा मारा गया, जहां से कई संदिग्ध सामग्री बरामद हुई.

नोटबंदी के बाद भी कैसे फल-फूल रहा नकली नोटों का कारोबार?

  • यह मामला कई बड़े सवाल खड़े करता है-
  • क्या नोटबंदी के बाद भी नकली नोटों पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई?
  • इतने बड़े स्तर पर नकली नोटों का नेटवर्क कैसे सक्रिय रहा?
  • क्या सिस्टम में कहीं बड़ी चूक हो रही है?
  • इन सवालों के जवाब अब जांच एजेंसियों को तलाशने होंगे.
India News
अगला लेख