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Chaitra Navratri 2026: इस नवरात्रि में मिलेगा विशेष फल, 72 साल बाद बन रहा है ये दुर्लभ संयोग

चैत्र नवरात्रि 2026 इस बार बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि 72 साल बाद एक दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस योग में की गई पूजा-अर्चना और साधना का फल कई गुना बढ़कर मिलने की मान्यता है.

Chaitra Navratri 2026:  इस नवरात्रि में मिलेगा विशेष फल, 72 साल बाद बन रहा है ये दुर्लभ संयोग
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( Image Source:  AI Perplexity )
State Mirror Astro
By: State Mirror Astro5 Mins Read

Updated on: 18 March 2026 6:30 AM IST

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व होता है. चैत्र नवरात्रि पर जहां देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना होती है, वहीं इस तिथि पर नए हिंदू नववर्ष विक्रम संवत का शुभारंभ भी होता है. चैत्र नवरात्रि पर विधि-विधान के साथ लगातार 9 दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना मांगी जाती है. इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं. इसके अलावा चैत्र नवरात्रि पर कुछ विशेष और दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग भी बन रहा है. दरअसल इस वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि अमावस्या के साथ शुरू हो रही है.

चैत्र अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 मार्च को होगी और समापन 19 मार्च, वहीं चैत्र प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सूर्योदय के बाद आरंभ होगी और समापन 20 मार्च को सूर्योदय से पहले ही खत्म हो जाएगी. हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार,नवरात्रि पर घटस्थापना का सही समय चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से होता है. ऐसे में इस वर्ष 19 मार्च को अमावस्या तिथि पर नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ 9 दिनों तक चलने वाला पवित्र चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगा.

चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 2026

  • प्रारम्भ - मार्च 18, सुबह 08 बजकर 25 मिनट से
  • समाप्त - मार्च 19, सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर

चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 2026

  • प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ - मार्च 19, 2026 को सुबह 06 बजकर 52 मिनट से
  • प्रतिपदा तिथि समाप्त - मार्च 20, 2026 को सुबह 04 बजकर 52 मिनट पर

72 साल बाद कौन सा दुर्लभ संयोग बन रहा है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है, लेकिन इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर चैत्र अमावस्या का दुर्लभ संयोग भी बनने जा रहा है. यह दुर्लभ संयोग 72 साल बाद दोबारा बन रहा है. जिससे कारण इसका खास महत्व है. द्रिग पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चैत्र अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 मार्च को सुबह 08 बजकर 25 मिनट से होगी और समापन 19 मार्च को सुबह 06 जबकर 52 मिनट पर होगा. अमावस्या तिथि के समापन के बाद से ही प्रतिपदा तिथि लग जााएगी. इस तिथि पर चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होगी जिसमें कलश स्थापना के साथ माता के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना की जाएगी. हिंदू धर्म में अमावस्या और प्रतिवदा दोनों ही तिथियां सूर्योदय से माना जाती है. जिसके कारण 19 मार्च को अमावस्या पर गंगा स्नान, दान और पितरों का तर्पण भी किया जाएगा और इस दिन चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना भी होगी.

चैत्र प्रतिपदा पर कलश स्थापना का क्या है शुभ मुहूर्त?

नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व हिंदू धर्म में माना जाता है. चैत्र नवरात्रि प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ शुरू हो जाती है. इस साल चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को है और इस दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट से लेकर 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. वहीं कलश स्थापना का दूसरा मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 05 मिनट से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा जिसमें कलश स्थापना कर सकते हैं.

कलश स्थापना की क्या है विधि

  • सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा का संकल्प लेते हुए कलश स्थापना के स्थान का चयन करें.
  • कलश स्थापना के लिए घर के उत्तर-पूर्व की दिशा सबसे अच्छी मानी जाती है. इसके अलावा घर के मंदिर के पास कलश स्थापना कर सकते हैं.
  • कलश स्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में शुद्ध मिट्टी डाल और उसमें जौ बोएं.
  • इससे बाद तांबे या फिर मिट्टी के कलश लें और उसमें शुद्ध जल, गंगाजल, सुपारी, अक्षत और सिक्का डालें.
  • कलश के मुख पर 5 आम के पत्ते रखें फिर इसके ऊपर जटा वाले नारियल को लाल चुनरी या लाल कपड़े में लपेटकर रख दें.
  • फिर विधि-विधान के साथ कलश की पूजा करें और मां दुर्गा का ध्यान करते हुए उनका आवाहन करें.
  • व्रत का संकल्प ले और नौ दिनों तक माता के साथ कलश की भी पूजा करें.
चैत्र नवरात्रि
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