UAE के पीछे क्यों पड़ा है ईरान? इजराइल-अमेरिका से जंग के बीच कर रहा इतने धुआंधार हमले
ईरान लगातार यूएई को निशाना बना रहा है. हर रोज इस मुल्क के अलग-अलग हिस्सों में हमले होते हैं. अगर ईरान की जंग अमेरिका और इजराइल के साथ है तो वह इस अरब मुल्क को क्यों निशाना बना रहा है? आइये जानते हैं पूरी डिटेल
Why Iran Attacking UAE: महीने भर पहले तक दुबई और अबू धाबी में पर्यटकों की भारी भीड़ थी. अजमान और शारजाह में तेल, लॉजिस्टिक्स और फाइनेंस से जुड़ा व्यापार सामान्य रूप से चल रहा था. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं. इन शहरों के आसमान में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हैं और लड़ाकू विमान लगातार उड़ान भर रहे हैं, क्योंकि यूएई इस समय ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे का सामना कर रहा है.
15 मार्च तक अबू धाबी के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने 298 बैलिस्टिक मिसाइल, 15 क्रूज मिसाइल और 1,606 ड्रोन को रोका है. यह आंकड़े कतर, बहरीन, सऊदी अरब और कुवैत जैसे अन्य खाड़ी देशों की तुलना में काफी ज्यादा हैं.
सवाल यह उठता है कि ईरान यूएई को इतनी तीव्रता से क्यों निशाना बना रहा है. इसके पीछे कई रणनीतिक और प्रतीकात्मक कारण बताए जा रहे हैं.
ईरान क्यों बना रहा है UAE को निशाना?
सबसे बड़ा कारण यह है कि यूएई में अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, जैसे अल धफरा एयर बेस. ईरान सीधे अमेरिका पर हमला करने में सक्षम नहीं है, इसलिए वह उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बना रहा है. हालांकि अन्य खाड़ी देशों में भी अमेरिकी बेस हैं, लेकिन यूएई को अमेरिका का “मेजर डिफेंस पार्टनर” माना जाता है. 2024 में दोनों देशों के बीच एक समझौता भी हुआ था, जिसमें एडवांस हथियारों और संयुक्त सैन्य अभ्यास पर सहयोग बढ़ाया गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई पर हमले करके ईरान अमेरिका के सहयोगियों पर दबाव बनाना चाहता है, ताकि वे तेहरान के खिलाफ चल रहे अभियानों से दूरी बनाएं.
क्या हो सकती है और वजह?
एक और कारण यूएई की वैश्विक पहचान है. यूएई खुद को पश्चिम और खाड़ी देशों के बीच एक पुल के रूप में स्थापित कर चुका है. यह देश फाइनेंस, पर्यटन, टेक्नोलॉजी और व्यापार का बड़ा केंद्र है. ईरान लंबे समय से क्षेत्र में पश्चिमी प्रभाव का विरोध करता रहा है, इसलिए वह यूएई जैसे करीबी अमेरिकी सहयोगी को निशाना बना रहा है.
किन जगहों को निशाना बना रहा है ईरान?
ईरान ने सिर्फ सैन्य ठिकानों पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक केंद्रों पर भी हमले किए हैं. जेबेल अली और फुजैराह जैसे बंदरगाहों और एयरपोर्ट्स को निशाना बनाकर वैश्विक व्यापार और तेल बाजार पर असर डालने की कोशिश की गई है. इससे यूएई की एक सुरक्षित और स्थिर देश की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास भी देखा जा रहा है.
दुबई और अबू धाबी लंबे समय से पर्यटन के बड़े केंद्र रहे हैं. लेकिन अब टूरिस्ट सोशल मीडिया पर ड्रोन हमलों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं, जिससे यूएई की छवि प्रभावित हो सकती है. पाम जुमेराह और Burj Khalifa जैसे प्रतिष्ठित स्थानों के आसपास हमलों की खबरें भी सामने आई हैं.
Abraham Accords भी कैसे है हमलों की वजह?
इसके अलावा 2020 में हुए Abraham Accords भी एक अहम कारण हैं. इस समझौते के तहत यूएई और इजराइल के बीच संबंध सामान्य हुए थे, जिसे ईरान विश्वासघात के रूप में देखता है.
युद्ध के बीच कुछ दावे यह भी सामने आए हैं कि 28 फरवरी को यूएई के एक बेस से दागी गई अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल गलती से ईरान के मिनाब स्थित एक आईआरजीसी ठिकाने के पास गिरी, जिसमें 165 से ज्यादा स्कूली छात्राओं की मौत हो गई. इस घटना ने ईरान के गुस्से को और बढ़ा दिया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का मकसद पश्चिमी देशों और उनके सहयोगियों पर अधिकतम राजनीतिक और सामाजिक दबाव बनाना है. यूएई जैसे हाई-प्रोफाइल सहयोगी को निशाना बनाकर वह अमेरिका पर इंडायरेक्ट दबाव डालना चाहता है.
इन हमलों का असर यूएई की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ा है. कई बार हवाई क्षेत्र बंद करना पड़ा, उड़ानें रद्द हुईं और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है. हालांकि यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर हमलों को रोक लिया है, लेकिन देश का आत्मविश्वास कमजोर पड़ा है, क्योंकि अमेरिका भी पूरी तरह उसकी मदद नहीं कर पाया है.
कब शुरू हुए थे UAE पर हमले?
ईरान ने 28 फरवरी को अपने सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में हमले शुरू किए. खामेनेई की मौत अमेरिका और इजराइल के हमलों में हुई थी. इसके बाद ईरान ने बदले की कार्रवाई करते हुए सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे, जिनका निशाना अमेरिका के ठिकाने और उसके सहयोगी देश बने. इन हमलों में यूएई सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है.
इन हमलों का असर आम नागरिकों पर भी पड़ा है. दुबई के Burj Al Arab के पास मलबा गिरने से नुकसान हुआ है. यूएई के बंदरगाहों पर आग लगने की घटनाएं भी सामने आई हैं. अबू धाबी और दुबई में कम से कम छह लोगों की मौत हुई है, जबकि दुबई में एक भारतीय नागरिक के घायल होने की पुष्टि भारत के विदेश मंत्रालय ने की है.




