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कोहरे-ठंड की परवाह नहीं! मौनी अमावस्या पर संगम नगरी में डुबकी लगाने पहुंच रहे श्रद्धालु; देखें Videos

माघ मास की मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है. 18 जनवरी 2026 को ब्रह्म मुहूर्त से ही संगम तट पर पवित्र स्नान शुरू हो गया, और अब तक लाखों श्रद्धालु गंगा–यमुना–सरस्वती के संगम में डुबकी लगा चुके हैं. प्रशासन के अनुसार आज तीन से चार करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए NDRF, SDRF, जल पुलिस, ATS कमांडो, AI कैमरे और ड्रोन की तैनाती की गई है.

कोहरे-ठंड की परवाह नहीं! मौनी अमावस्या पर संगम नगरी में डुबकी लगाने पहुंच रहे श्रद्धालु; देखें Videos
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( Image Source:  ANI )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Updated on: 18 Jan 2026 8:03 AM IST

माघ मास की अमावस्या, जिसे मौनी अमावस्या कहा जाता है, इस बार 18 जनवरी रविवार को श्रद्धा और भक्ति के विराट रूप में सामने आई है. ब्रह्म मुहूर्त से ही संगम तट पर स्नान का सिलसिला शुरू हो गया, और रात से ही श्रद्धालुओं का रेला घाटों की ओर बढ़ने लगा. यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और मौन साधना का महापर्व माना जाता है. आज प्रयागराज में आस्था का ऐसा दृश्य है, जहां हर ओर “हर-हर गंगे” की गूंज सुनाई दे रही है.

मौनी अमावस्या को लेकर प्रशासन ने पहले से ही व्यापक इंतजाम किए हैं. अनुमान है कि आज तीन से चार करोड़ श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान के लिए पहुंच सकते हैं. प्रयागराज मंडल की आयुक्त सौम्या अग्रवाल के मुताबिक अब तक करीब 50 लाख लोग स्नान कर चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है. भीड़ को संभालने के लिए नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक, पुलिस और प्रशासनिक टीमें चौकस हैं.

सुरक्षा व्यवस्था: हर स्तर पर कड़ी निगरानी

श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है. NDRF, SDRF, पीएसी, जल पुलिस और गोताखोरों की तैनाती के साथ-साथ ATS कमांडो और खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हैं. संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए AI-सक्षम कैमरे और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अजय पाल शर्मा के अनुसार, भीड़ पर रियल-टाइम निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके.

साढ़े तीन किलोमीटर तक फैले घाट

माघ मेला अधिकारी ऋषि राज ने बताया कि मौनी अमावस्या के स्नान के लिए साढ़े तीन किलोमीटर तक घाटों का निर्माण किया गया है. श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी घाट पर ही स्नान करें ताकि भीड़ संतुलित रहे. मेला क्षेत्र को सात सेक्टरों में बांटा गया है और एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है.

हर वर्ग का रखा गया ध्यान

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 42 अस्थायी पार्किंग स्थल बनाए गए हैं, जहां एक लाख से अधिक वाहन खड़े किए जा सकते हैं. बाइक टैक्सी और गोल्फ कार्ट जैसी सुविधाएं बुजुर्गों और जरूरतमंद श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध हैं. 25,000 से अधिक शौचालय और 3,500 से ज्यादा सफाईकर्मियों की तैनाती से स्वच्छता पर विशेष जोर दिया गया है.

टेंट सिटी और कल्पवासियों के लिए विशेष व्यवस्था

माघ मेला 800 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं के लिए टेंट सिटी बसाई गई है. यहां ध्यान, योग और साधना की सुविधाएं मौजूद हैं. प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालु केवल स्नान ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शांति का अनुभव लेकर लौटें.

हर स्नान पर्व पर बढ़ती भीड़

मौनी अमावस्या से एक दिन पहले ही लगभग 1.5 करोड़ श्रद्धालु गंगा और संगम में स्नान कर चुके थे. इससे पहले मकर संक्रांति पर 1.03 करोड़ और एकादशी पर करीब 85 लाख लोगों ने डुबकी लगाई थी. ये आंकड़े बताते हैं कि माघ मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है.

आस्था, व्यवस्था और अनुशासन का संगम

प्रयागराज में मौनी अमावस्या का यह दृश्य आस्था और प्रशासनिक तैयारी का अनूठा संगम बन गया है. करोड़ों लोगों की मौजूदगी के बावजूद सुव्यवस्था, सुरक्षा और सुविधा—तीनों का संतुलन बनाए रखने की कोशिश जारी है. यह पर्व न सिर्फ धार्मिक विश्वास को मजबूत करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि संगठित प्रयासों से इतने विशाल जनसमूह को सुरक्षित और व्यवस्थित रखा जा सकता है.

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